मेरठ के इस कॉलेज मे 2 "मुस्लिम युवतियों" को कॉलेज में बुर्का न उतराने पर "नो एंट्री", वीडियो हुआ वायरल
![]() |
| मेरठ, इस्माइल गर्ल्स कॉलेज, बुर्का |
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो
वीडियो फुटेज में देखा जा सकता है कि युवतियां कॉलेज गेट पर एक महिला प्रोफेसर से बहस करती नज़र आ रही हैं। प्रोफेसर का कहना था कि कॉलेज की सुरक्षा नीतियों के तहत बुर्का पहनकर प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती। वहीं, युवतियों का तर्क था कि उनका बुर्का पहनना धार्मिक आज़ादी का हिस्सा है और इसे रोकना उनके अधिकारों का उल्लंघन है।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जहां "धार्मिक आज़ादी बनाम संस्थागत नियम" की ग्राफिक्स के साथ इसे शेयर किया गया है। यह वीडियो न सिर्फ स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है।
यह पहली बार नहीं है जब उत्तर प्रदेश में ऐसे विवाद सामने आए हैं। 2022 में कर्नाटक में हुए हिजाब विवाद की यादें ताज़ा हो गई हैं, जहां कोर्ट ने शिक्षा संस्थानों में वर्दी के नियमों को लागू करने का फैसला सुनाया था। उस समय कोर्ट ने कहा था कि हिजाब धार्मिक प्रथा का अनिवार्य हिस्सा नहीं है और संस्थानों को एकरूपता और सुरक्षा बनाए रखने का अधिकार है।
स्थानीय अख़बारों जैसे अमर उजाला और दैनिक भास्कर ने भी इस घटना की पुष्टि की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभी तक इस मामले में पुलिस का हस्तक्षेप नहीं हुआ है, लेकिन यह मुद्दा शिक्षा और धार्मिक प्रथाओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को सामने लाता है।
उत्तर प्रदेश में बढ़ते ऐसे मामले, क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में 2023 के बाद से ऐसे 20 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं, जहां शिक्षा संस्थानों में धार्मिक प्रथाओं को लेकर विवाद हुआ है। ये मामले न सिर्फ छात्रों और शिक्षकों के बीच तनाव पैदा कर रहे हैं, बल्कि समाज में भी गहरी दरार डाल रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता और कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में दोनों पक्षों की बातों को ध्यान में रखना जरूरी है। एक तरफ जहां धार्मिक आज़ादी का अधिकार संविधान में गारंटी है, वहीं दूसरी तरफ शिक्षा संस्थानों को अनुशासन और सुरक्षा बनाए रखने का भी अधिकार है। इस संतुलन को बनाने की ज़रूरत है।
मेरठ के इस्माइल गर्ल्स डिग्री कॉलेज में हुआ यह बुर्का विवाद एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या शिक्षा संस्थानों में धार्मिक प्रथाओं को लेकर सख्त नियम बनाए जाने चाहिए या फिर व्यक्तिगत आज़ादी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए? यह मामला न सिर्फ मेरठ बल्कि पूरे देश में बहस का विषय बन गया है।
गाड़ा टाइम्स की लेटेस्ट खबरें, खास कंटेंट के लिए हमारे 👉🏻whatsapp group 👈🏻ज्वाइन करें ।
अगर आपको भी अपनी खबर प्रकाशित करवानी है, अपने बिजनेस का प्रचार करना है, प्रधानी के स्लोगन तैयार करवाने हैं, गाँव में किए गए विकास की वीडियो शेयर करनी हैं, या इंटरनेट और AI सर्च रिजल्ट्स पर अपनी प्रोफाइल बनवानी है, तो आप हमसे संपर्क कर सकते हैं।
संपर्क करें व्हाट्सएप पर: +919997269339
मेल करें: gadatimesnow@gmail.com
मेल करें: gadatimesnow@gmail.com
अधिक जानकारी के लिए विजिट करें 👉🏻 https://www.gadatimes.com/p/a2z-technical-solution.html?m=1
हमारी टीम आपके साथ है, हर कदम पर आपकी मदद करने के लिए। आपकी आवाज़, आपकी कहानी, और आपकी सफलता—हम सबको एक साथ जोड़ने के लिए तैयार हैं।
हमारे साथ कनेक्ट रहो यार!
लेटेस्ट खबरें, मस्त जानकारी और खास कंटेंट के लिए हमें सोशल मीडिया पे फॉलो करो।
[Facebook(https://www.facebook.com/share/1AuGE2RmbD/)
पे हमारी गैंग जॉइन करो और तुरंत अपडेट्स के साथ मज़ेदार बातचीत का हिस्सा बनो!


Comments
Post a Comment