मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध कथा वाचक भास्कराचार्य को कार में एक शादीशुदा महिला के साथ सेक्स करते महिला के पति ने पकड़ा
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| रायपुर न्यूज,वायरल स्टोरी |
रायपुर, 1 नवंबर 2025: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के तिकरापारा इलाके में 30 अक्टूबर को एक ऐसा वाकया हुआ, जिसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। मध्य प्रदेश के मशहूर धार्मिक कथावाचक पंडित भास्कराचार्य को एक शादीशुदा महिला रीना गुप्ता के साथ कार में आपस में लिपटे हुए पकड़ा गया। गुस्साए पति अनिल गुप्ता और स्थानीय लोगों ने उन्हें जमकर पीटा, और तो और, उनके पूज्य शिखा (चोटी) को भी काट दिया। यह घटना न सिर्फ धार्मिक नैतिकता पर सवाल खड़ी कर रही है, बल्कि समाज में लिंग भेदभाव और पितृसत्तात्मक सोच को भी उजागर कर रही है।
क्या हुआ था उस रात? पति का अनोखा बयान: 'जा लो मेरी पत्नी'!
रात के अंधेरे में तिकरापारा की सड़कों पर एक कार खड़ी थी। अंदर मध्य प्रदेश से आए भास्कराचार्य और रायपुर की रहने वाली रीना गुप्ता के बीच ऐसी नजदीकी थी कि बाहर खड़े लोगों को शक हो गया। रीना एक शादीशुदा महिला हैं, जिनका पति अनिल गुप्ता स्थानीय व्यवसायी हैं। जब अनिल को इसकी भनक लगी, तो उन्होंने तुरंत स्थानीय लोगों को बुला लिया। गुस्से में भरे लोगों ने भास्कराचार्य को कार से बाहर निकाला और उन पर हमला बोल दिया। मारपीट के दौरान किसी ने उनकी चोटी काट दी, जो हिंदू परंपरा में एक अपमानजनक कृत्य माना जाता है।
फोटो में साफ दिख रहा है कि भास्कराचार्य की चोटी कटी हुई है, और उनका चेहरा डर और शर्म से लाल हो गया था। यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, और अब तक लाखों लोग इसे देख चुके हैं।
सबसे हैरान करने वाली बात तो यह आई जब अनिल गुप्ता ने थाने पहुंचकर एक लिखित बयान दिया। उन्होंने पुलिस को बताया कि वह अपनी पत्नी को भास्कराचार्य के साथ रहने की इजाजत देते हैं। "अगर वह खुश रहना चाहती हैं, तो मैं बाधा नहीं बनूंगा," अनिल ने बयान में लिखा। इस वजह से पुलिस ने भास्कराचार्य पर कोई आपराधिक केस दर्ज नहीं किया, भले ही उन पर मारपीट हुई हो। अनिल का यह कदम या तो मजबूरी का परिणाम था या फिर एक चतुराई भरा फैसला, जो सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गया है।
कई लोग इसे "निरुपाय पति" का प्रतीक बता रहे हैं, जो समाज में पुरुषों पर थोपी गई भूमिका को दिखाता है। वहीं, कुछ इसे धार्मिक कथावाचकों की दोहरी जिंदगी का सबूत मान रहे हैं – मंच पर उपदेश देने वाले, जो निजी जीवन में खुद उन सिद्धांतों का पालन नहीं करते।
सोशल मीडिया पर बवाल: हंसी-मजाक से लेकर गंभीर बहस तक
- धार्मिक पाखंड: भास्कराचार्य जैसे कथावाचक समाज को नैतिकता सिखाते हैं, लेकिन खुद ऐसी गलती कैसे कर बैठे? यह धार्मिक नेताओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है।
- महिलाओं की आजादी: रीना का फैसला साहसी था या मजबूरी? समाज में शादीशुदा महिलाओं को व्यक्तिगत पसंद की आजादी कब मिलेगी?
- लिंग असमानता: अगर उल्टा होता – एक महिला कथावाचिका पुरुष के साथ पकड़ी जाती – तो क्या प्रतिक्रिया ऐसी ही होती? पुरुषों को "निरुपाय" कहकर हम महिलाओं को मजबूत दिखाने की कोशिश क्यों कर रहे हैं?
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. मीरा शर्मा कहती हैं, "यह घटना सिर्फ एक व्यक्तिगत मामला नहीं, बल्कि सिस्टम की कमजोरी दिखाती है। धार्मिक गुरुओं को बैकग्राउंड चेक की जरूरत है, और कानून में वैवाहिक विश्वासघात के लिए सख्त प्रावधान होने चाहिए।" वहीं, मनोवैज्ञानिक प्रो. राजेश तिवारी का मानना है कि अनिल का बयान "भावनात्मक थकान" का संकेत हो सकता है, जो तलाक के मामलों में बढ़ रहा है।पुलिस ने बताया कि मामला सुलझ चुका है, लेकिन भास्कराचार्य ने अब तक कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया। क्या यह उनकी छवि को हमेशा के लिए धूमिल कर देगा? समय ही बताएगा।
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